क्या कोई फेयर एंड लवली क्रीम लगाकर कोई गोरा हुआ है? अगर ऐसा है तो अफ्रीका वाले क्यों काले हैं ? दुनिया मैं फेयर एंड लवली लगाकर कोई गोरा नहीं हुआ है न ही कोई संभावना है । क्यूंकि आदमी के गोरा और काला होने का सिद्धांत ही अलग है, हमारे शरीर मैं एक केमिकल होता है उसका नाम है मेलेनिन (Melanin) , जब मेलेनिन की मात्रा बढ़ जाती है तो शरीर काला हो जाता है और जब मेलेनिन की मात्रा कम होती है तो शरीर गोरा होता है और जब मेलेनिन की मात्रा न बढ़ती है और न घटती है तो रंग सांवला होता है । हम हिंदुस्तियों की आदर्श स्तिथि यही है की हममें मेलेनिन न ज्यादा है न कम।
सांवले शरीर वाले मनुष्य में कैंसर होने की सम्भावना सबसे काम होती है क्यूंकि सांवले मनुष्य के रक्त में मेलेनिन की मात्रा सही होती है। इसलिए हमें अपने सांवले रंग पर गर्व करना चाहिए न की शर्मिंदगी महसूस करनी चहिये, इसको हीं भावना से नहीं देखना चाहिए ।
फेयर एंड लवली लगभग २००० रु किलो पड़ती है, जिससे कुछ होना नहीं है, इससे अच्छा तो चार किलो बादाम खाएं जिससे सेहत बनती है और चेहरे पर रौनक बनी रहती है। दुनिया में किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की परीक्षा उसके रंग से नहीं बल्कि उसके कर्म, उसके गुण और उसके स्वभाव से होती है।
हम सभी समझदार हैं और अपने आस पास या अपने घर में ही क्या हमने किसी को फेयर एंड लवली लगाकर गोरा होते देखा है जबकि कंपनी अपने प्रचार में दावा करती है की फेयर एंड लवली क्रीम लगाने के हफ्ते बाद ही रंग गोरा होने लगता है। अपने आस पास देख कर और उन लोगों को देखकर जो सालों से फेयर एंड लवली क्रीम लगा रहे हैं और आज भी वैसे के वैसे ही हैं, हम कुछ भी समझ नहीं पाते।
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