हमेशा अपना सिर पूर्व (East) या दक्षिण ( South) दिशा की ओर करके ही सोयें । उत्तर (North) और पश्चिम (West) दिशा की ओर सिर करके सोने से ही सबसे ज्यादा मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं। ये कोई पाखण्ड नहीं है। भारतीय संस्कृति में जो भी कहा गया है उसके पीछे बहुत गहरा विज्ञान छुपा होता है, ये अलग बात है की ज्यादातर लोग इसको बिना जानकारी के उपयोग करते हैं और अपनी सुविधानुसार तोड़ मरोड़ करके इस्तेमाल करते हैं जोकि अन्धविश्वास का रूप ले लेती है।
दिशा का तर्क : बाणभट्ट जी कहते हैं की हमें विश्राम करते समय अपने सिर को सूर्य (Sun) यानि पूर्व की दिशा में रखना चाहिए और पाँव पश्चिम (West) दिशा में रखें और किसी कारणवश अगर पूर्व में नहीं कर पाएं तो दक्षिण (South ) में जरूर करें । उत्तर (North ) में सिर करके कभी न सोएं , उत्तर की दिशा मृत्यु की दिशा है । उत्तर की दिशा पढ़ने (study) के लिए बहुत अच्छी मानी गयी है , कुछ भी लिखना या अभ्यास करना है तो उत्तर में मुंह करके करें लेकिन सोने के लिए बिलकुल निषिद्ध है । स्वामी दयानंद सरस्वती भी अपनी किताब संस्कार विधि में इसका उल्लेख किया है की मृत व्यक्ति का सिर उत्तर दिशा में रखें उसके बाद संस्कार की विधि शुरू करें ।
अब विज्ञान की भी बात कर लेते हैं : हमारा आधुनिक विज्ञान कहता है की हमारे शरीर और पृथ्वी के बीच में एक बल काम करता है जिसको गुरुत्वाकर्षण (Gravity) बल कहते हैं , पृथ्वी का उत्तर और दक्षिण सबसे ज्यादा तीव्र होते हैं गुरुत्वाकर्षण के लिए , पृथ्वी का उत्तर और पृथ्वी का दक्षिण एक चुम्बक (magnet) की तरह काम करते हैं गुरुत्वाकर्षण के लिए , हमारे शरीर में सिर उत्तर है और पाँव दक्षिण , तो सिर का उत्तर और पृथ्वी का उत्तर दोनों साथ में आएं तो प्रतिकरषण बल (force of repulsion) काम करता है । जब ये प्रतिकर्षण बल यानी धक्का देने वाला बल काम करेगा तो हमारे शरीर में संकुचन (contraction) आएगा और अगर शरीर में संकुचन आया तो ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) कंट्रोल से बाहर हो जाएगा और अगर खून में प्रेशर है तो नींद तो ठीक से आएगी ही नहीं, ह्रदय (Heart) की गति हमेशा तीव्र रहेगी । इस क्रिया को उल्टा करें यानी शरीर का सर (यानी उत्तर को ) पृथ्वी के दक्षिण की तरफ रखें तो फ़ोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन (Force of attraction ) काम करेगा और वो शरीर को बड़ा करेगा जिससे शरीर रिलैक्स होता है । पूर्व (East ) न्यूट्रल है न वहां फ़ोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन है न फ़ोर्स ऑफ़ रेपुलसन है । पश्चिम दिशा के लिए अभी भी रिसर्च चल रही है, उसके बारे में अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा है ।